उत्तर प्रदेश के एटा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने प्रशासनिक तंत्र और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश सरकार में महिला कल्याण एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य और जिलाधिकारी अरविंद सिंह के बीच फोन कॉल को लेकर विवाद की स्थिति बन गई जो जल्द ही सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया।
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| BJP leader Baby rani maurya with Arvind Kumar Singh |
क्या हुआ था घटनास्थल पर
मामला बुधवार का है जब मंत्री बेबी रानी मौर्य एटा कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं। यह आयोजन रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं को साड़ी और अन्य सामग्री वितरित करने के उद्देश्य से रखा गया था। कार्यक्रम में पहुंचने से पहले मंत्री कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचीं जहां उन्हें प्रोटोकॉल के अनुसार अपेक्षित स्वागत व्यवस्था नहीं मिली। न तो जिलाधिकारी स्वयं मौजूद थे और न ही उनकी अगवानी के लिए किसी उपजिलाधिकारी स्तर के अधिकारी को तैनात किया गया था।
इससे नाराज होकर मंत्री ने व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के लिए जिलाधिकारी अरविंद सिंह को फोन करना शुरू किया। रिपोर्टों के अनुसार,मंत्री की ओर से डीएम को एक-दो बार नहीं, बल्कि करीब 17 से 18 बार फोन मिलाया गया, लेकिन न तो कॉल रिसीव हुई और न ही बाद में कॉल बैक किया गया। स्थिति तब और नाजुक हो गई जब मंत्री के निजी सहायक (पीए) की ओर से भी लगातार संपर्क करने की कोशिश की गई बावजूद इसके किसी तरह की प्रतिक्रिया प्रशासन की ओर से नहीं आई।
बेबी रानी मौर्य से जाहिर की नाराजगी
अपनी नाराजगी को छुपाए बिना बेबी रानी मौर्य ने कार्यक्रम के दौरान ही डीएम की मौजूदगी में इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने प्रोटोकॉल में हुई इस चूक को गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधि के फोन कॉल की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है और अधिकारियों को इस तरह की लापरवाही से बचना चाहिए। मंत्री का कहना था कि वह केवल कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के इरादे से संपर्क करने की कोशिश कर रही थीं न कि किसी और वजह से।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों के जरिए कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर से निकलकर प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया जिसमें आम लोगों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक हलकों की भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
जिलाधिकारी अरविंद सिंह की तरफ से नहीं आई सफाई
हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर जिलाधिकारी अरविंद सिंह की ओर से सार्वजनिक तौर पर विस्तृत सफाई सामने नहीं आई है कि आखिर उनकी ओर से फोन कॉल का जवाब क्यों नहीं दिया जा सका। प्रशासनिक अधिकारियों के व्यस्त कार्यक्रम, नेटवर्क संबंधी दिक्कतें या बैठक जैसी वजहें आमतौर पर ऐसे मामलों में सामने आती रही हैं लेकिन इस विशेष घटना में आधिकारिक स्पष्टीकरण का अभाव मामले को और सुर्खियों में ला रहा है।
आगे क्या
फिलहाल इस घटना को लेकर कोई औपचारिक जांच या कार्रवाई की सूचना सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह यह वीडियो और खबर तेजी से फैली है उससे स्थानीय प्रशासन पर आने वाले दिनों में स्पष्टीकरण देने का दबाव बढ़ सकता है। यह भी देखने वाली बात होगी कि क्या शासन स्तर पर इस मामले का कोई संज्ञान लिया जाता है या यह विवाद यहीं थम जाता है।
